Current Affairs in Hindi : 13 जनवरी 2019

■सर्वोच्च न्यायालय ने चारधाम परियोजना को मंज़ूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को आल-वेदर रोड से जोड़ा जायेगा।
इन आल वेदर रोड का निर्माण पर्यावरण की दृष्टि से हिमालय के संवेदनशील क्षेत्रों में किया जाता है, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में इस परियोजना पर प्रश्न खड़े किये गये थे। परन्तु NGT ने इस परियोजना को मंज़ूरी दे दी थी तथा इस परियोजना में पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित निर्माण की मॉनिटरिंग के लिए एक समिति  का गठन किया था।
बाद में NGT के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी। सर्वोच्च न्यायालय ने NGT के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

चारधाम यात्रा का महत्व
यमुनोत्री पवित्र नदी यमुना का उद्गम स्थल है। गंगोत्री अथवा गोमुख गंगा नदी का उद्गमस्थल है। इस स्थान पर देवी गंगा के लिए एक मंदिर भी समर्पित है।
हिन्दू धर्म में चारधाम यात्रा का काफी महत्व है, चारधाम यात्रा शब्द सर्वप्रथम श्री आदि शंकराचार्य ने उपयोग किया था। इस यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, उसके बाद तीर्थयात्री गंगोत्री जाते हैं, तत्पश्चात केदारनाथ की यात्रा की जाती है। बाद में यह यात्रा बद्रीनाथ में समाप्त हो जाती है।
यमुनोत्री पवित्र नदी यमुना का उद्गम स्थल है। गंगोत्री अथवा गोमुख गंगा नदी का उद्गमस्थल है। इस स्थान पर देवी गंगा के लिए एक मंदिर भी समर्पित है।
केदारनाथ भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। केदारनाथ मंदिर का जीर्णोधार आदि शंकराचार्य ने किया था। बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। बद्रीनाथ में स्थित मंदिर भगवान् विष्णु के लिए समर्पित है।
चारधाम विकास योजना  केन्द्रीय सड़क परिवहन व उच्चमार्ग मंत्रालय की परियोजना है।

■राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10% आरक्षण प्रदान करने वाले बिल को मंज़ूरी दे दी है।
इससे पहले आर्थिक रूप से पिछड़े हुए सामान्य वर्गों को सरकारी नौकरी तथा उच्च शिक्षा में 10% आरक्षण देने के लिए लोकसभा और राज्यसभा ने संविधान (124वां संशोधन) बिल, 2019 को पारित किया था। इसके बाद इस बिल को न्यायिक जांच से होकर गुज़रना पड़ेगा।
हाल ही में केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरी तथा उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की थी। इसके बाद सामान्य वर्ग के उन लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा जो आर्थिक रूप से पिछड़े हुए है।

इस आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा?
रिपोर्ट के अनुसार इस आरक्षण का लाभ उन्हें मिलेगा जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है तथा जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है।
यह 10% आरक्षण पहले से मौजूद 50% से अधिक हो जायेगा।
इस आरक्षण के लिए सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करना होगा।


क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध है?
मंडल केस में सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए 10% आरक्षण के प्रस्ताव को गलत ठहराया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के मुताबिक सामाजिक पिछड़ेपन के बिना आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ापन आरक्षण का आधार नही बन सकता।
इंद्रा साहनी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था थी नौकरी, शिक्षा तथा विधायिका में कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता।
इस निर्णय को लागू करने के लिए संविधान की नौवीं अनुसूची में परिवर्तन करना  होगा। इसका एक उदारहण तमिलनाडु से सम्बंधित है। तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जातियां व अनुसूचित जनजातियाँ (शैक्षणिक संस्थानों तथा राज्य सरकार के अधीन नियुक्तियों में आरक्षण) अधिनियम, 1993 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया था, इसके द्वारा तमिलनाडु की आरक्षण सीमा को 69% पर रखा गया है। हालाँकि इस कानून को न्यायिक जांच से होकर भी गुज़रना पड़ेगा।

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